तुलसी पूर्णिमा देवीय स्वरूप

घर की सारी परेशानियां निपटा देगा ” तुलसी गायत्री मंत्र ” -;
हिन्दू धर्म में तुलसी का पौधा देवीय स्वरूप में पूजनीय है। धर्मग्रंथों के मुताबिक तुलसी भगवान विष्णु की प्रिय बताई गई हैं। हिंदू धर्म परंपरा में भगवान विष्णु की भक्ति का ही महीना माना गया है – वैशाख मास। पुराणों में लक्ष्मी स्वरूपा तुलसी और भगवान विष्णु स्वरूप शालिग्राम के विवाह के प्रसंग भी तमाम दोषों व दरिद्रता को दूर कर खुशहाल बनने के सबक सिखाती है। पूर्णिमा तिथि (25 मई) पर करने के लिए पवित्र तुलसी के पौधे से ही जुड़ा एक ऐसा उपाय, जो घर में चल रही परेशानियों को दूर कर देगा – धार्मिक नजरिए से घर में तुलसी का पौधा और उसकी उपासना कलह व जाने-अनजाने पापों को मिटाने वाली मानी गई है। व्यावहारिक तौर पर भी तुलसी को खान-पान में शामिल करना रोग भगाने और ऊर्जा देने वाला माना गया है। वहीं हर सुबह की पूजा परंपरा में विशेष मंत्र के जरिए तुलसी स्मरण का एक उपाय भी बड़ी ही शुभ फल देता है। शास्त्रों में तुलसी को जगतजननी मां गायत्री का स्वरूप भी माना गया है। गायत्री स्वरूप का ध्यान कर तुलसी पूजा मन या घर-परिवार को खुशहाल बनाने वाली मानी गई है। खासतौर पर वैशाख पूर्णिमा पर सुबह तुलसी गायत्री मंत्र का पाठ मनोरथ व कार्यसिद्धि में असरदार माना गया है। स्नान के बाद घर के आंगन या देवालय में लगे तुलसी के पौधे में गंगाजल, गंध, फूल, लाल वस्त्र चढ़ाकर पूजा करें। फल का भोग लगाएं। धूप व दीप जलाकर उसके नजदीक बैठकर तुलसी की ही माला से तुलसी गायत्री मंत्र का श्रद्धा से सुख की कामना से कम से कम 108 बार स्मरण कर अंत में तुलसी की पूजा करें-


ऊँ श्री तुलस्यै विद्महे।
विष्णु प्रियायै धीमहि।
तन्नो वृन्दा प्रचोदयात्।।
– पूजा व मंत्र जप में हुई त्रुटि की क्षमा प्रार्थना आरती के बाद कर फल का प्रसाद ग्रहण करें।

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