पॉजिटीव चित्रों व मूर्तियों की करें पूजा

सृष्टि(संसार) (3+5=8) मूल में आठ तत्वों से बनी है (इस बात को सभी धर्माचार्यो ने अलग-2 नामों से माना है फिर 8+16+84 = 108 कुल मुख्य तत्व है । इसके समझने के लिए ही पूर्वकाल के वेज्ञानिकों (ऋर्षि महर्षियों) ने माला के 108 मनके बनाये है । उसके बाद अलग-अलग कार्यो के लिए इसमें इनके उपतत्व बनकर जुड़ते जाते है और संसार के कार्य (उत्पति, पालन, संहार) चल रहे है । प्रथम मुख्य 3+5= 8 तत्व हैं, महापुरुषों ने अथक प्रयास (तपस्या) करके, खोज करके मानव एवं प्राणीमात्र सुख शांति का जीवन कैसे व्यतीत करें, उसका सार शास्त्रों सद्ग्रन्थों के माध्यम से प्राणी मात्र के सुख के लिए बताया है। उन नियमों का सही रूप से पालन करने पर ही कोई भी व्यक्ति दुःख व अषान्ति का निराकरण कर सकता है । गत हजारों वर्षो से इन नियमों में गल्तियां होनी आरम्भ हो गई थी जो आज 95 प्रतिषत से 99 प्रतिषत तक हो गई है । इसी कारण आज सर्वत्र अषान्ति अराजकता, अकाल, प्राकृतिक, प्रकोप आदि व शारीरिक मानसिक दुःख और विपरीत परिस्थितियां दिनों दिन बढ़ती जा रही है । इन्हीं आठ तत्वों को अष्टघा प्रकृति के नाम से एवं दूसरी जगह दूसरे नामों से कहा गया है ।
सारे ब्रह्माण्ड (संसार) की उत्पत्ति पालन, संहार का आधार ये आठ तत्व ही है । इनको अलग-अलग जगह पर अलग-अलग नामों से कहा जाता है ।
पूजा दो स्वरूपों में की जाती है ।
(1) देवता (पुरूष रूप) (2) देवी (स्त्री स्वरूप)
देवता (पुरूष) का दाहिना (त्पहीज) जीवणा अंग शुद्ध है ($) है सकारात्मक है, पोजेटिव है देवी सम्पदा का है बायां (स्मजि) डावा अंग अषुद्ध है (-) है नेगेटिव है नकारात्म्क है आसुरी सम्पदा का है । इसी तरह देवी (स्त्री) का बायां अंग (स्मजि) शुद्ध है ($) है सकारात्मक है पोजेटिव है देवी सम्पदा का है एवं दायां अंग जीवणा (त्पहीज) अंग अषुद्ध हे नेगेटिव है (-) है नकारात्मक है । आसुरी सम्पदा का है । इसीलिए पुरूष के दाहिने हाथ में रक्षा बन्धन किया जाता है, महिलाओं के बाये हाथ में रक्षा बांधी जाती है एवं यज्ञ, दान, पूजा, अभिषेक, कराने के समय स्त्री पति के दाहिने अंग की तरफ बैठती है ।
प्रमाण – सर्व मंगल कार्येषु पत्निष्तिश्ठति दक्षिणः अग्नि पुराण के 34 में अध्याय में भगवान के अस्त्र बायें भाग में एवं 23 वे अध्याय में लक्ष्मीजी भगवान के दाहिनी तरफ विराजमान का प्रमाण लिखा है। चित्र नं 5 विज्ञान एवं गणित के सिद्धान्तानुसार प्रमाण एवं शास्त्रों में वर्णित तथ्यों की सही एवं गलत की पुष्टि इस सिद्धान्तों से होती है ।
हनुमान जी का – बायंे भुजा असुर दलमारे दाहिनी भुजा संतजन तारे (आरती),
वामे करे वैरी भयं वहंतं, षैलंचदक्षेनिज कंठ लग्नम (ब्रह्माण्ड पुराण)
वामहस्ते महावष्क्षं दसास्यकर खण्डनम्
उद्दद्दक्षिण दोर्दण्डम् हनुमंत विंचितयेत (ब्रह्माण्ड पुराण)
इन सब शास्त्र (पुराणों) एवं गणित के प्रमाण से पता चलता है कि देवता के बायें हाथ में ही शस्त्र होने चाहिए दाहिने हाथ में कल्याणकारी चीजें होनी चाहिए एवं देवी के दाहिने हाथ में शस्त्र एवं बायें हाथ में कल्याणकारी वस्तु होनी चाहिए यही सही है उसकी सत्यता की पुष्टी गणित एवं विज्ञान के प्रमाण से होती है ।
अतः सभी भक्तों से सादर अनुरोध है कि कृपा करके इन प्रमाणों की सत्यता को समझकर अपने घरों में मंदिरों में जो गलत मूर्ति एवं फोटो स्थापित है उनकी विर्सजन पूजा करके जल प्रवाह करादें एवं सही मूर्ति फोटो की स्थापना करें ताकि आपके घरों परिवारों में राष्ट्र में विष्व में सुख शांति की स्थापना हो सकें, देवी सम्पदा की वृद्धि हो आसुरी सम्पदा खत्म हो सकें ।
नोट:- अगर सही फोटो नहीं मिले तो कृपया हमसे सम्पर्क करें । हम सही शास्त्र व विज्ञान सम्मत फोटो उचित लागत मुल्य पर उपलब्ध करवायेंगे ।
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शर्मा कम्प्यूटर्स एवं ज्योतिष केन्द्र, नगरपालिका के पास, सुमेरपुर मो. 9829107556

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