कालसर्प दोष के उपाय

🐍🐍कालसर्प दोष के उपाय

यादि कुण्डली में कालसर्पयोग पड़ा हो, तो निम्नलिखित किंचित उपाय करने शुभ एवं कल्याणकारी होंगे ।
🐉 कालसर्प की अरिष्ट शान्ति के लिए शिव मन्दिर में सवा लाख ॐ नमः शिवाय मन्त्र का पाठ करना तथा पाठोपरान्त रूद्राभिषेक करवाने का विशेष महत्त्व है । साथ ही शिवलिंग पर चांदी का सर्प युगल – नागा स्तोत्र एवं नागा पूजनादि कर के चढ़ाना शुभ होगा ।नाग गायत्री मन्त्र – (ॐ ‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍नव कुलाय विधाहे विषदंताय धीम
तन्नो सर्पः

🐉 प्रत्येक शनिवार एक नारियल को तैल एवं काले तिलों का तिलक लगाकर , मौली लपेटकर अपने शिर से तीन बार घुमा कर ॐ भ्रं भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः मन्त्र कम से कम तीन बार पढ़करचलते पानी में बहा देवें ऐसे कम से कम पाँच शनिवार करें।

🐉प्रत्येक शनिवार कुत्तों को दूध और चपाती डालनी तथा गौओं ,कौओं को तैल के छीटें देकर रसोई की प्रथम चपातियां डालना शुभ है।

🐉कालसर्पयोग के कारण यदि वैवाहिक जीवन में बाधा आती हो, तो जातक पत्नी के साथ दोबारा विवाह करें एवं घर के चौखट द्वार पर चांदी का स्वस्तिक चिन्ह बनवा कर लगवाएं।

🐉घर में मयूर पंखका पंखा पवित्र स्थान पर रखें तथा भगवान शिव का ध्यान करते हुए प्रातः उठते ही तथा सोने से पूर्व मयूरपंखेद्वारा हवा करें।

🐉प्रत्येक संक्रान्ति को गंगा जल सहित गोमूत्र का छिड़काव घर के सभी कमरों में करें।

🐉 कालसर्प योग शान्ति के लिए नवनाग देवताओं के नाम का उच्चारण करना

🐉महाकुम्भ पर्व के अवसर पर प्रमुख स्नान करें और कुम्भ में स्थित शिव मन्दिर में जाकर विधिपूर्वक पूजन करें ।चाँदी के बने नाग – नागिन के कम से कम 11 जोडे प्रतिदिन शिवलिङग में चढ़ाएँ तथा महादेव से इस कुयोग से मुक्ति से प्रगान करने की प्रार्थना करें।

🐉सोना -7 रत्ती , चाँदी – 12 रत्ती , तांबा 16 रत्ती – ये तीनों मिलाकर सर्पाकार अंगूठी अनामिका अंगुली में धारण करने से वांछित लाभ प्राप्त होता है । जिस दिन धारण करें, उस दिन राहु की सामग्री का अंशिक दान भी करना चाहिए।

🐉नागपंचमी का व्रत करें तथा नवनाग स्तोत्र का पाठ करें। अनन्त चतुर्दशी का व्रत भी विधिपूर्वक रखे

🐉 प्रत्येक बुधवार को काले वस्त्र में उड़द या मूंग एक मुट्ठी डालकर , राहु का मन्त्र जाप किसी भिखारी को दे देवें । यदि दान लेने वाला कोई ना मिले तो बहते पानी में उस अन्न को छोड़ देना चाहिए । इस प्रकार 72 बुधवार करते रहने से अवश्य लाभ होता है ।

🐉 यदि किसी स्त्री की कुण्डली इस योग से दूषित है तथा संतित का अभाव है , पूजन – विधि नहीं करवा सकती तो किसी अश्वत्थ (बट) के वृक्ष से नित्य 108 प्रदक्षिणा (घेरे) लगाने चाहिए । तीन सौ दिन में जब 28000 प्रदक्षिणा पूरी होगीं तो दोष दूर होकर वतः ही संतति की प्राप्ति होगी।

🐉इसके अतिरिक्त महाकाल रूद्र स्तोत्र , मनसादेवी नाग स्तोत्र, महामृत्युञ्जय आदि स्तोत्रों का विधि जा- विधान से पूजन , हवनकरने से कालसर्प दोष की शान्ति हो जाता है।

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