हस्तरेखा से जानिए आपकी किस्मत

मानव-शरीर के विभिन्न अंगों की बनावट के आधार पर उसके गुण-कर्म-स्वाभावादि का निरूपण करने वाली विद्या आरंभ में लक्षण शास्त्र के नाम से प्रसिद्ध थी।

हाथ की परीक्षा
प्रातःकाल शौच-स्नानादि से निवृत्त होकर देवपूजनोपरांत अपने हाथ में श्रीफल (नारियल), ऋतुफल, मिष्ठान्न, पुष्प एवं दक्षिणा आदि लेकर हस्त परीक्षक की सेवा में उपस्थित होना चाहिए।

सामान्यतः पुरुषों का दायाँ तथा स्त्रियों का बायाँ हाथ देखना चाहिए। अतः वर्तमान जीवन की जानकारियाँ दाएँ हाथ से तथा पूर्व-जन्मार्जित कर्म-फल विषयक ज्ञातव्य बाएँ हाथ से प्राप्त करना चाहिए। स्त्रियों के विषय में इससे विपरीत समझना चाहिए।

हस्त-परीक्षा का सर्वोत्तम समय प्रातःकाल का है। ग्रहण के समय, श्मशान में, मार्ग में चलते समय तथा भीड़-भाड़ में हाथ नहीं देखना चाहिए। हाथ दिखाने वाले के अतिरिक्त यदि कोई अन्य व्यक्ति भी उपस्थित हो तो उस समय हाथ नहीं देखना चाहिए, जल्दबाजी में हाथ देखना वर्जित है।

* अगर किसी रेखा के साथ-साथ कोई और रेखा चले तो उस रेखा को शक्ति मिलती है। अतः उस रेखा का विशेष प्रभाव समझना चाहिए। कमजोर, दुर्बल अथवा मुरझाई हुई रेखाएँ बाधाओं की सूचक होती हैं।

* अस्पष्ट और क्षीण रेखाएँ बाधाओं की पूर्व सूचना देती हैं। ऐसी रेखाएँ मन के अस्थिर होने तथा परेशानी का संकेत देती हैं।

* अगर कोई रेखा आखिरी सिरे पर जाकर कई भागों में बँट जाए तो उसका फल भी बदल जाता है। ऐसी रेखा को प्रतिकूल फलदायी समझा जाता है।

* टूटी हुई रेखाएँ अशुभ फल प्रदान करती हैं।

* अगर किसी रेखा में से कोई रेखा निकलकर ऊपर की ओर बढ़े तो उस रेखा के फल में वृद्धि होती है।

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हथेली या हस्तरेखा से जानिए आपकी किस्मत/भाग्य केसा और क्या होगा..???
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हाथों में दिखाई देने वाली रेखाएं और हमारे भविष्य का गहरा संबंध है। इन रेखाओं का अध्ययन किया जाए तो हमें भविष्य में होने वाली घटनाओं की भी जानकारी प्राप्त हो सकती है। वैसे तो हाथों की सभी रेखाओं का अलग-अलग महत्व होता है। किसी व्यक्ति को कितना मान-सम्मान और पैसा मिलेगा यह भी रेखाओं से मालुम हो जाता है। यहां दिए गए फोटो में देखिए और समझिए आपके हाथों की रेखाएं क्या कहती हैं.

हथेली के अलग-अलग क्षेत्र, जिन्हें हस्तरेखा शास्त्र में हथेली के पर्वत कहा जाता है, वे चुंबकीय केंद्र हैं। इन केंद्रों का मस्तिष्क के उन केंद्रों से संबंध है जो मानव के मनोभावों पर नियंत्रण करते हैं। हथेली के ये पर्वत मस्तिष्क में तैयार होने वाली विद्युत तरंगों को आकृष्ट करते हैं और हस्तरेखाएँ उन तरंगों के मार्ग हैं।

इसी बात को दूसरे शब्दों में हम यों कह सकते हैं कि जिस प्रकार ई.सी.जी. का ग्राफ हृदय की क्रियाशीलता के विषय में बताता है उसी प्रकार हथेली पर बना हुआ रेखाओं का ग्राफ मस्तिष्क की क्रियाशीलता के विषय में बताता है। रेखाओं के इस ग्राफ का अर्थ समझने की विद्या को हस्तरेखा ज्ञान या पामिस्ट्री कहते हैं। हस्तरेखा शास्त्र हथेली को सात भागों में बाँटता है। इन भागों के नाम ज्योतिष शास्त्र से लिए गए हैं।

मेरे निष्कर्ष के अनुसार मस्तिष्क का जो केंद्र व्यक्ति के अहं भाव का नियंत्रण करता है उसका हथेली के जिस भाग से संबंध है उसे गुरु पर्वत कहते हैं। मस्तिष्क का जो केंद्र व्यक्ति की अंतर्मुखता का नियंत्रक है, उसका संबंध हथेली के उस भाग से है जिसे हस्त विज्ञान में शनि पर्वत कहा जाता है। इसी प्रकार मस्तिष्क का जो केंद्र व्यक्ति की बहिर्मुखता का नियंत्रण करता है, हथेली में उस केंद्र से संबंधित भाग को सूर्य पर्वत कहते हैं। इसी प्रकार मस्तिष्क के अलग-अलग भावों से संबंधित हथेली के मार्ग को बुध, शुक्र, चंद्र तथा मंगल पर्वत कहा गया है।

जिन महिलाओं की उंगलियां छोटी होती हैं, वे जरूरत से ज्यादा खर्चीली होती हैं। दोनों हाथों की उंगलियों को जोड़ने पर उनके बीच यदि खाली जगह दिख रहे हैं तो इसका मतलब भी उनका खर्चीला होना ही है। ऐसी महिलाओं का भविष्य काफी कठिनाइयों से भरा होता है।
हाथ की उँगलियों के बारे में मेरा निष्कर्ष है कि उँगलियाँ मस्तिष्क में तैयार विद्युत तरंगों को व्यक्ति के शरीर से बाहर बिखेरने के लिए ट्रांसमीटर (प्रेषित करने) जैसा काम करती हैं और व्यक्ति के आसपास के वातावरण में फैली विद्युत तरंगों को मस्तिष्क तक पहुँचाने के लिए ये ही उँगलियाँ रिसीवर (ग्रहण करने) का काम भी करती है।

कितनी महत्वपूर्ण है हस्तरेखा विज्ञान में मणिबंध रेखा—

कलाई पर मौजूद आड़ी रेखाएं मणिबंध रेखाएं कहलाती है। हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार कलाई पर दिखाई देने वाली इन रेखाओं से व्यक्ति के जीवन और भाग्य की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इन रेखाओं के आधार पर व्यक्ति की आयु का भी आकलन किया जा सकता है। हर व्यक्ति की कलाई में मणिबंध रेखा की संख्या अलग-अलग होती है।
ज्योतिषशास्त्र की मान्यता जिस व्यक्ति की कलाई पर चार मणिबंध रेखाएं बनती हैं उनकी आयु सौ वर्ष हो सकती है। जिसकी कलाई में तीन मणिबंध रेखाएं होती है। उनकी आयु 75 वर्ष की होती है। दो रेखाएं होने पर 50 वर्ष और एक मणिबंध होने पर आयु 25 वर्ष मानी जाती है। यानी एक मणिबंध रेखा लगभग 25 वर्ष के अंतराल को दर्शाती है।
यदि मणिबंध रेखाएं टूटी हुई हों या छिन्न-भिन्न हो तो उस व्यक्ति के जीवन में बराबर बाधाएं आती रहती है। मणिबंध रेखा जंजीरदार होने पर व्यक्ति को जीवन में बहुत सारी उलझनों का सामना करना पड़ता है। इसके विपरित यदि ये रेखाएं निर्दोष और स्पष्ट हो तो प्रबल भाग्योदय होता है। मणिबंध पर यव यानी गेहूं की आकृति के समान चिन्ह हो तो यह चिन्ह सौभाग्य सूचक माना जाता है।
मणिबंध रेखा पर द्वीप का चिन्ह होना जीवन में अनेक दुर्घटनाओं का संकेत देता है। दो मणिबंध रेखाओं का आपस में मिल जाना दुर्भाग्यशाली माना जाता है। इससे दुर्घटना में शरीर के किसी अंग की विशेष क्षति का संकेत मिलता है। मणिबंध की रेखाएं जितनी अधिक स्पष्ट और गहरी होती है। उतनी ही ज्यादा अच्छी मानी जाती है।
हस्त रेखा विज्ञान के अनुसार मणिबंध से कोई रेखा निकलकर ऊपर की ओर जाती है तो ऐसे व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। यदि मणिबंध से कोई रेखा निकलकर चन्द्र पर्वत पर जाए तो ऐसा व्यक्ति जीवन में कई विदेश यात्राएं करता है।
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जानिए अपने हाथों में भविष्य देखने का खास तरीका——

ज्योतिष शास्त्र में कई ऐसी विद्याएं बताई गई हैं जिनसे किसी भी व्यक्ति के भूत, भविष्य और वर्तमान को देखा जा सकता है। इन्हीं विद्याओं में से एक है हस्तरेखा। हाथों की रेखाओं में हमारा भविष्य छुपा होता है और हथेली का अध्ययन करने पर किसी भी व्यक्ति के विषय में संपूर्ण जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

हस्तरेखा के अनुसार हाथों का परीक्षण सावधानी से करना चाहिए। सभी रेखाओं का अपना अलग महत्व है और वे अन्य रेखाओं के शुभ-अशुभ प्रभाव को कम या ज्यादा करने में सक्षम होती है। इसी वजह से इन रेखाओं को देखने के लिए मैग्नीफाइन ग्लास का प्रयोग करना चाहिए। हस्तरेखा से भविष्य देखने के लिए सबसे पहले अंगुलियों, अंगूठे और हथेली की बनावट देखनी चाहिए। फिर बायां हाथ देखें, इसके बाद दायां हाथ। अब दोनों हाथों की रेखाओं और बनावट में अंतर समझें। अब हाथों की हर भाग हथेली, करपृष्ठ, नाखुन, त्वचा, रंग, अंगुलियां, अंगूठा तथा कलाई आदि का परीक्षण करें। अंगूठा देखें इसके बाद हथेली की कठोरता या मृदुता देखें। फिर अंगुलियों पर ध्यान दें और सभी ग्रह क्षेत्रों का अध्ययन करें। इसके बाद सभी रेखाओं को एक-एक करके ध्यानपूर्वक देखें और अध्ययन करें। हाथों का अध्ययन जितनी गहराई और ध्यान से किया जाएगा, भविष्यफल उतना ही सटीक बैठेगा।
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हाथ में ये रेखा बताती है आपके कितने प्रेम प्रसंग हैं या होंगे—-

हमारी जैसी सोच रहती है उसी के अनुरूप हाथों की रेखाओं बदलाव होते रहते हैं। सामान्यत: हमारे हाथों की कई छोटी-छोटी रेखाएं बदलती रहती हैं परंतु कुछ खास रेखाओं में बड़े परिवर्तन नहीं होते हैं। इन महत्वपूर्ण रेखाओं में जीवन रेखा, भाग्य रेखा, हृदय रेखा, मणिबंध, सूर्य रेखा और विवाह रेखा शामिल है।

हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार विवाह रेखा से किसी व्यक्ति भी व्यक्ति के विवाह और प्रेम प्रसंग पर विचार किया जाता है।

फोटो में देखिए विवाह रेखा के प्रभाव क्या-क्या रहते हैं…

कहां होती है विवाह रेखा- विवाह रेखा लिटिल फिंगर (सबसे छोटी अंगुली) के नीचे वाले भाग में होती है। कुछ लोगों के हाथ में एक विवाह रेखा होती है तो कुछ लोगों के हाथों में एक से अधिक। सबसे छोटी अंगुली के नीचे वाले क्षेत्र को बुध पर्वत कहते हैं। बुध पर्वत के अंत में कुछ आड़ी गहरी रेखाएं होती हैं। यह विवाह रेखाएं कहलाती है।

ऐसा माना जाता है कि जिन विवाह रेखाओं की संख्या होती है उस व्यक्ति के उतने ही प्रेम प्रसंग हो सकते हैं। यदि यह रेखा टूटी हो या कटी हुई हो विवाह विच्छेद की संभावना होती है। साथ ही यह रेखा आपका वैवाहिक जीवन कैसा रहेगा यह भी बताती है। यदि रेखाएं नीचे की ओर गई हुई हों तो दांम्पत्य जीवन में आपको काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

यदि विवाह रेखा के आरंभ में दो शाखाएं हो तो उस व्यक्ति की शादी टूटने का भय रहता है।

हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार विवाह रेखा से किसी व्यक्ति भी व्यक्ति के विवाह और प्रेम प्रसंग पर विचार किया जाता है।

यदि किसी स्त्री के हाथ में विवाह रेखा के आरंभ में द्वीप चिन्ह हो तो उसका विवाह किसी धोखे से होगा, ऐसी संभावनाएं रहती हैं।

यदि बुध पर्वत से आई हुई कोई रेखा विवाह रेखा को काट दे तो उस व्यक्ति का वैवाहिक जीवन परेशानियों भरा होता है।

यदि विवाह रेखा रिंग फिंगर (अनामिका) के नीचे सूर्य रेखा तक गई हो तो उस व्यक्ति का विवाह किसी विशिष्ट व्यक्ति से होता है।

विवाह रेखा पर विचार करते समय शुक्र पर्वत (अंगूठे के नीचे वाला भाग शुक्र पर्व कहलाता है। इसका क्षेत्र जीवन रेखा तक होता है।) पर भी विचार करना चाहिए।

दोनों हाथों की सभी रेखाओं और हाथों की बनावट का भी व्यक्ति के स्वभाव और भविष्य पर प्रभाव पड़ता है। अत: इस हाथों का सही-सही अध्ययन किया जाना चाहिए।
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जानिए हथेली में कहां कौन सी रेखाएं होती हैं, जो बताती हैं किस्मत. –

भविष्य से जुड़े सभी प्रश्नों के सटीक उत्तर ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्राप्त किए जा सकते हैं। यदि किसी व्यक्ति को ज्योतिष में महारत हासिल हो तो वह आने वाले कल में होने वाली घटनाओं की जानकारी दे सकता है। भविष्य जानने की कई विद्याएं प्रचलित हैं, इन्हीं में से एक विद्या है हस्तरेखा ज्योतिष। यहां जानिए हस्तरेखा से जुड़ी खास बातें, जिनसे आप भी समझ सकते हैं भविष्य…

हमारे जीवन से जुड़ी हर छोटी-बड़ी घटना का संकेत हमारे हाथों की रेखाओं में छिपा होता है। इन रेखाओं के सही अध्ययन से मालुम किया जा सकता है कि कोई व्यक्ति जीवन में कितनी उन्नति करेगा? कितनी सफलताएं या असफलताएं प्राप्त करेगा? व्यक्ति का स्वास्थ्य कैसा रहेगा या उसका विवाहित जीवन कैसा होगा?
हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार कुछ महत्वपूर्ण रेखाएं बताई गई हैं, इन्हीं रेखाओं की स्थिति के आधार पर व्यक्ति के जीवन की भविष्यवाणी की जा सकती है। ये रेखाएं इस प्रकार हैं-
जीवन रेखा: जीवन रेखा शुक्र क्षेत्र (अंगूठे के नीचे वाला भाग) को घेरे रहती है। यह रेखा तर्जनी (इंडेक्स फिंगर) और अंगूठे के मध्य से शुरू होती है और मणिबंध तक जाती है। इस रेखा के आधार पर व्यक्ति की आयु एवं दुर्घटना आदि बातों पर विचार किया जाता है।

मस्तिष्क रेखा: यह रेखा हथेली के मध्य भाग में आड़ी स्थिति में रहती है। मस्तिष्क रेखा जीवन रेखा के प्रारंभिक स्थान के पास से ही शुरू होती है। यहां प्रारंभ होकर मस्तिष्क रेखा हथेली के दूसरी ओर जाती है। इस रेखा से व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता पर विचार किया जाता है।

हृदय रेखा: यह रेखा मस्तिष्क रेखा के समानांतर चलती है। हृदय रेखा की शुरूआत हथेली पर बुध क्षेत्र (सबसे छोटी अंगुली के नीचे वाला भाग) के नीचे से आरंभ होकर गुरु क्षेत्र (इंडेक्स फिंगर के नीचे वाले भाग को गुरु पर्वत कहते हैं।) की ओर जाती है। इस रेखा से व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता, आचार-विचार आदि बातों पर विचार किया जाता है।

सूर्य रेखा: यह रेखा सामान्यत: हथेली के मध्यभाग में रहती हैं। सूर्य रेखा मणिबंध (हथेली के अंतिम छोर के नीचे आड़ी रेखाओं को मणिबंध कहते हैं।) से ऊपर रिंग फिंगर के नीचे वाले सूर्य पर्वत की ओर जाती है। वैसे यह रेखा सभी लोगों के हाथों में नहीं होती है। इस रेखा से यह मालूम होता है कि व्यक्ति को मान-सम्मान और पैसों की कितनी प्राप्ति होगी।

भाग्य रेखा: यह हथेली के मध्यभाग में रहती है तथा मणिबंध अथवा उसी के आसपास से आरंभ होकर शनि क्षेत्र (मिडिल फिंगल यानी मध्यमा अंगुली के नीचे वाले भाग को शनि क्षेत्र कहते हैं।) को जाती है। इस रेखा से व्यक्ति की किस्मत पर विचार किया जाता है।

स्वास्थ्य रेखा: यह बुध क्षेत्र (सबसे छोटी अंगुली के नीचे वाले भाग को बुध पर्वत कहते हैं।) से आरंभ होकर शुक्र पर्वत (अंगूठे के नीचे वाले भाग को शुक्र पर्वत कहते हैं) की ओर जाती है। इस रेखा से व्यक्ति की स्वास्थ्य संबंधी बातों पर विचार किया जाता है।

विवाह रेखा: यह बुध क्षेत्र (सबसे छोटी अंगुली के नीचे वाले भाग को बुध क्षेत्र कहते हैं।) पर आड़ी रेखा के रूप में रहती है। यह रेखा एक से अधिक भी हो सकती है। इस रेखा से व्यक्ति के विवाह और वैवाहिक जीवन पर विचार किया जाता है।

संतान रेखा: यह बुध क्षेत्र (सबसे छोटी अंगुली के नीचे वाले भाग को बुध क्षेत्र कहते हैं।) पर खड़ी रेखा के रूप में रहती है। यह रेखा एक से अधिक भी हो सकती है। इस रेखा से मालूम होता है कि व्यक्ति की कितनी संतान होंगी। संतान रेखा से यह भी मालूम हो जाता है कि व्यक्ति को संतान के रूप में कितनी लड़कियां और कितने लड़के प्राप्त होंगे।

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अंगूठे के हर पर्व में है ज्योतिष ज्ञान—

अंगूठा हमारी पूरी हथेली का प्रतिनिधित्व करता है और यह इच्छा शक्ति एवं मन को बल प्रदान प्रदान करता है। हस्तरेखा शास्त्र यानी पामिस्ट्री में तो अंगूठे के हर पोर का विशेष महत्व है।

हस्तरेखीय ज्योतिष अंगूठे को ज्ञान का पिटारा कहता है जिसके हरेक पोर में व्यक्ति के विषय में काफी रहस्य छुपा होता है। इस पिटारे की एक मात्र चाभी है हस्त रेखा विज्ञान का सूक्ष्म ज्ञान अर्थात जिसने हस्तरेखा विज्ञान का सूक्ष्मता से अध्ययन किया है वह इस पर लगा ताला खोल सकता है। आप भी अगर हस्तरेखा विज्ञान को गहराई से समझने के इच्छुक हैं तो आपको भी अंगूठे पर दृष्टि जमानी होगी अन्यथा इस शास्त्र में आप कच्चे रह जाएंगे अर्थात “अंगूठा टेक” ही रह जाएंगे।

अंगूठे के विषय में जानकारी हासिल करने के लिए सबसे पहले तो आप अपना अंगूठा गौर से देखिये, आप देखेंगे कि अंगूठा हड्डियों के दो टुकड़ों से मिलकर बना है और अन्य उंगलियो की तरह इसके भी तीन पर्व यानी पोर हैं। इसके तीनों ही पर्व व्यक्ति के विषय में अलग अलग कहानी कहती है।

अंगूठे का पहला पर्व———

सामुद्रिक ज्योतिष के अनुसार जिस व्यक्ति के अंगूठे का पहला पर्व लम्बा होता है वह व्यक्ति आत्मविश्वास से भरा होता है और अपना जीवन पथ स्वयं बनता है। ये आत्मनिर्भरता में यकीन करते हैं और सजग रहते हैं। हथेली का पहला पर्व लम्बा हो यह तो अच्छा है लेकिन अगर यह बहुत अधिक लम्बा है तो यह समझ लीजिए कि व्यक्ति असामाजिक गतिविधियों को अंजाम देने वाला है, यह खतरनाक काम कर सकता है। दूसरी ओर जिस व्यक्ति के अंगूठे का पहला पर्व छोटा होता है वह दूसरों पर निर्भर रहते हैं और जिम्मेवारी भरा निर्णय नहीं ले पाते हैं। ये काम को गंभीरता से नहीं लेते हैं। पहला पर्व अगर चौड़ा है तो समझ लीजिए यह व्यक्ति मनमानी करने वाला अर्थात जिद्दी है। जिनका पहला पर्व लगभग समकोण जैसा दिखता हो उनके साथ होशियारी से पेश आने की जरूरत होती है क्योंकि ये काफी चालाक और तेज मस्तिष्क वाले होते हैं।

अंगूठे का दूसरा पर्व ——–

अंगूठे का दूसरा भाग लम्बा होना बताता है कि व्यक्ति चालाक और सजग है, यह व्यक्ति सामाजिक कार्यों एवं जनसेवा के कार्यों में सक्रिय रहने वाला है। दूसरा पूर्व जिनका छोटा होता है वे बिना आगे पीछे सोचे काम करने वाले होते हैं परिणाम की चिंता नहीं करते यही कारण है कि ये ऐसा काम कर बैठते हैं जो जोखिम और खतरों से भरा होता है। दूसरा पर्व अंगूठे का दबा हुआ है तो यह बताता है कि व्यक्ति गंभीर और संवेदशील है और इनकी मानसिक क्षमता अच्छी है।

अंगूठे का तीसरा पर्व—————-

अंगूठे का तीसरा पर्व वास्तव में शुक्र पर्वत का स्थान होता है जिसे व्यक्ति विश्लेषण के समय अंगूठे के तीसरे पर्व के रूप में लिया जाता है ,यह पर्व अगर अच्छी तरह उभरा हुआ है और गुलाबी आभा से दमक रहा है तो यह मानना चाहिए कि व्यक्ति प्यार और रोमांस में काफी सक्रिय है। इस स्थिति में व्यक्ति जीवन के कठिन समय को भी हंसते मुस्कुराते गुजराना जानता है। यह पर्व अगर सामान्य से अधिक उभरा हुआ है तो यह जानना चाहिए कि व्यक्ति में काम की भावना प्रबल है यह इसके लिए किसी भी सीमा तक जा सकता है। अंगूठे का तीसरा पर्व अगर सामन्य रूप से उभरा नहीं है और सपाट है तो यह कहना चाहिए कि व्यक्ति प्रेम और उत्साह से रहित है।

उम्मीद है आप अंगूठे की महिमा पूरी तरह समझ चुके होंगे, तो अब से अंगूठे को गौर से देखिए और व्यक्ति को पहचानिए।
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हस्तरेखा विज्ञान बहुत प्राचीन है —- पं. दयानन्द शास्त्री
हस्तरेखा विज्ञान बहुत प्राचीन विज्ञान है। किसी भी व्यक्ति के हाथ के गहन अध्ययन द्वारा उस व्यक्ति के भूत, भविष्य और वर्तमान तीनों कालों के बारे में आसानी से बताया जा सकता है। हस्तरेखा में अँगुलियों का बहुत महत्वपूर्ण स्थान होता है। अँगुलियों के द्वारा व्यक्ति का पूरी तरह एक्स-रे किया जा सकता है।

अँगुलियाँ छोटी-बड़ी, मोटी-पतली, टेढ़ी-मेढ़ी, गाँठ वाली तथा बिना गाँठ वाली कई प्रकार की होती हैं। प्रत्येक अँगुली तीन भागों में बँटी होती है, जिन्हें पोर कहते हैं। पहली अँगुली को तर्जनी, दूसरी अँगुली को मध्यमा, तीसरी अँगुली को अनामिका तथा चौथी अँगुली को कनिष्ठा कहा जाता है। ये अँगुलियाँ क्रमशः बृहस्पति, शनि, सूर्य तथा बुध के पर्वतों पर आधारित होती हैं।

प्रत्येक अँगुली की अलग-अलग परीक्षा की जाती है। लम्बाई के हिसाब से अधिक लम्बी अँगुलियों वाला व्यक्ति दूसरे के काम में हस्तक्षेप अधिक करता है। लम्बी और पतली अँगुलियों वाला व्यक्ति चतुर तथा नीतिज्ञ होता है। छोटी अँगुलियों वाला व्यक्ति अधिक समझदार होता है। बहुत छोटी अँगुलियों वाला व्यक्ति सुस्त, स्वार्थी तथा क्रूर प्रवृति का होता है। जिस व्यक्ति की पहली अँगुली यानी अँगूठे के पास वाली अँगुली बहुत बड़ी होती है वह व्यक्ति तानाशाही अर्थात् लोगों पर अपनी बातें थोपने वाला होता है।

यदि अँगुलियों मिलाने पर तर्जनी और मध्यमा के बीच छेद हो तो व्यक्ति को 35 वर्ष की उम्र तक धन की कमी रहती है। यदि मध्यमा और अनामिका के बीच छिद्र हो तो व्यक्ति को जीवन के मध्य भाग में धन की कमी रहती है। अनामिका और कनिष्का के बीच छिद्र बुढ़ापे में निर्धनता का सूचक है। जिस व्यक्ति की कनिष्ठा अँगुली छोटी तथा टेड़ी-मेड़ी हो तो वह व्यक्ति जल्दबाज तथा बेईमान होता है।

यदि अँगुलियों के अग्र भाग नुकीले हों और अंगुलियों में गाँठ दिखाई न दे तो व्यक्ति कला और साहित्य का प्रेमी तथा धार्मिक विचारों वाला होता है। काम करने की क्षमता इनमें कम होती है। सांसारिक दृष्टि से ये निकम्मे होते हैं।
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हथेली की ये रेखा बताती है स्त्री-पुरुष के प्रेम-प्रसंग और शादी की बातें—-
हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार लगभग सभी लोगों की हथेली में विवाह या प्रणय रेखा होती है। कुछ लोगों के हाथों में एक से अधिक प्रणय रेखा होती है। यह रेखा बताती है कि व्यक्ति की शादी कब होगी? या नहीं होगी या वैवाहिक जीवन कैसा रहेगा? विवाह और प्रेम-प्रसंग से जुड़े सवालों के जवाब इस रेखा के अध्ययन से प्राप्त किए जा सकते हैं। यहां फोटो में जानिए विवाह रेखा से जुड़ी खास बातें…

हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार हमारे हाथों की छोटी-छोटी रेखाएं अक्सर बदलती हैं परंतु कुछ खास रेखाओं में बड़े परिवर्तन नहीं होते हैं। इन महत्वपूर्ण रेखाओं में जीवन रेखा, भाग्य रेखा, हृदय रेखा, मणिबंध, सूर्य रेखा और विवाह रेखा शामिल हैं। विवाह रेखा से व्यक्ति के वैवाहिक जीवन और प्रेम प्रसंग आदि की जानकारी प्राप्त होती है।

विवाह रेखा लिटिल फिंगर (सबसे छोटी अंगुली) के नीचे वाले भाग में हथेली के अंतिम छोर पर होती है। इस क्षेत्र को बुध पर्वत कहते हैं। बुध पर्वत के अंत में एक या एक से अधिक कुछ आड़ी गहरी रेखाएं होती हैं। यह विवाह रेखाएं कहलाती है।
यदि किसी व्यक्ति के हाथ में विवाह रेखा अंगुली की ओर यानि ऊपर की ओर मुड़ जाए तो उसकी शादी होने की संभावनाएं बहुत ही कम होती हैं। ऐसे लोग सामान्यत: अविवाहित ही रह जाते हैं।

यह रेखा हृदय रेखा के नीचे बनती हैं तो उस स्थिति में भी विवाह के योग बहुत कम रहते हैं। हृदय रेखा कहां होती हैं यह फोटो में दिखाया गया है।
ऐसा माना जाता है कि व्यक्ति के हाथों में जितनी विवाह रेखाएं होती हैं उसके उतने ही प्रेम प्रसंग हो सकते हैं। यदि यह रेखा टूटी हो या कटी हुई हो विवाह विच्छेद की संभावना होती है। साथ ही यह रेखा आपका वैवाहिक जीवन कैसा रहेगा यह भी बताती है। यदि रेखाएं नीचे की ओर गई हुई हों तो वैवाहिक जीवन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

यदि सबसे छोटी अंगुली के सबसे ऊपर वाले भाग पर कोई क्रॉस का चिन्ह बना हुआ हो तो ऐसी स्थिति में भी विवाह संबंधी परेशानियां निर्मित होती हैं।
हमारी हथेली में सबसे छोटी अंगुली के ठीक नीचे बुध पर्वत होता है। इसी हिस्से पर कुछ आड़ी रेखाएं होती हैं। यही विवाह रेखा कहलाती हैं। कुछ लोगों के हाथों में केवल एक विवाह रेखा होती है तो कुछ लोगों के हाथों में एक से अधिक।
कुछ विद्वानों का मानना है कि विवाह रेखा की संख्या से व्यक्ति का विपरित लिंग के प्रति कितना झुकाव है वह मालुम होता है। एक से अधिक विवाह रेखा होने पर माना जा सकता है कि उस व्यक्ति का किसी विपरित लिंग से काफी गहरा रिश्ता हो, इसे प्रेम नहीं मा सकता। यदि कोई गहरे दोस्त हैं तब भी इसप्रकार की रेखाएं हो सकती हैं। विवाह रेखा के साथ ही दोनों हथेलियों की सभी रेखाओं का गहन अध्ययन आवश्यक है। अन्यथा सटीक भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है।
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मान-सम्मान और पैसों की स्थिति बताने वाली रेखा सूर्य रेखा कहलाती है। यह रेखा अनामिका अंगुली के ठीक नीचे वाले भाग सूर्य पर्वत पर होती है। इसी वजह से इसे सूर्य रेखा कहा जाता है। यदि किसी व्यक्ति के हाथ में ये रेखा दोष रहित हो तो उसे जीवन में भरपूर मान-सम्मान और पैसा प्राप्त होता है। सामान्यत: ये रेखा सभी के हाथों में नहीं होती है। कई परिस्थितियों में ये रेखा होने के बाद भी व्यक्ति को पैसों की तंगी भी झेलना पड़ सकती है।

सूर्य रेखा रिंग फिंगर यानि अनामिका अंगुली के नीचे वाले हिस्से पर होती है। हथेली का ये भाग सूर्य पर्वत कहलाता है। यहां खड़ी रेखा हो तो वह सूर्य रेखा कहलाती है। यह रेखा सूर्य पर्वत से हथेली के नीचले हिस्से मणिबंध या जीवन रेखा की ओर जाती है। सूर्य रेखा यदि अन्य रेखाओं से कटी हुई हो या टूटी हुई हो तो इसका शुभ प्रभाव समाप्त हो सकता है।

यदि किसी व्यक्ति के हाथों में जीवन रेखा से निकलकर सूर्य रेखा अनामिका अंगुली की ओर जाती है तो व्यक्ति को भाग्यशाली बनाती है। ऐसे लोग जीवन में सभी सुख और सुविधाओं के साथ मान-सम्मान भी प्राप्त करते हैं।

हाथ देखकर मालूम हो जाता है किसी आदमी का कैरेक्टर कैसा है.?

हथेली का शुक्र पर्वत बताता है कि व्यक्ति कितना कामुक है। यहां दिए गए फोटो से जानिए हथेली में कहां होता है शुक्र पर्वत और हमारे जीवन पर इसका असर…

हथेली की रेखाएं और बनावट ध्यान से देखने पर किसी भी व्यक्ति का स्वभाव मालुम किया जा सकता है। कोई भी व्यक्ति स्वयं का स्वभाव और विचार छिपाने की चाहे कितनी ही कोशिश करें लेकिन हथेली के अध्ययन से उसके मन की बात सामने आ जाती है।

हाथों की बनावट और रेखाएं बता देती हैं कि आपका स्वभाव कैसा है? आपके विचार कैसे हैं? हस्तरेखा में रेखाओं के अतिरिक्त पर्वत क्षेत्र भी महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। पर्वत क्षेत्र यानी आपके हाथों में उभरे हुए अलग-अलग भाग।
हथेली की रेखाएं और बनावट ध्यान से देखने पर किसी भी व्यक्ति का स्वभाव मालुम किया जा सकता है। कोई भी व्यक्ति स्वयं का स्वभाव और विचार छिपाने की चाहे कितनी ही कोशिश करें लेकिन हथेली के अध्ययन से उसके मन की बात सामने आ जाती है।

हाथों की बनावट और रेखाएं बता देती हैं कि आपका स्वभाव कैसा है? आपके विचार कैसे हैं? हस्तरेखा में रेखाओं के अतिरिक्त पर्वत क्षेत्र भी महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। पर्वत क्षेत्र यानी आपके हाथों में उभरे हुए अलग-अलग भाग।

हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार इन पर्वत क्षेत्रों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण है शुक्र पर्वत क्षेत्र। हथेली के शुक्र पर्वत से किसी भी व्यक्ति के सौंदर्य, स्वास्थ्य, प्रणय, कामुकता, प्रेम और भोग विलास का अध्ययन किया जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति का शुक्र पर्वत जितना अधिक उन्नत होता है वह उतना ही कामुक हो सकता है। अत्यधिक उन्नत शुक्र पर्वत अच्छा नहीं माना जाता है

यदि किसी व्यक्ति की हथेली में सूर्य पर्वत (अनामिका की अंगुली यानी रिंग फिंगर के ठीक नीचे वाला भाग सूर्य पर्वत कहलाता है।) पर पहुंचकर सूर्य रेखा की एक शाखा शनि पर्वत (मीडिल फिंगर के नीचे वाला भाग शनि पर्वत कहलाता है।) की ओर तथा एक शाखा बुध पर्वत (सबसे छोटी अंगुली के ठीक नीचे वाला भाग बुध पर्वत होता है।) की ओर जाती हो तो ऐसा व्यक्ति बुद्धिमान, चतुर, गंभीर होता है। ऐसे लोग समाज में मान-सम्मान प्राप्त करते हैं और बहुत पैसा कमाते हैं।
करतल रेखाएं करतल (हथेली) पर पाई जाने वाली रेखाएं जीवन की सूक्ष्मतर स्थितियों की द्योतक होती है। इन रेखाओं में भी जीवनी शक्ति में अवरोध पैदा करने वाले दोष पाए जाते है। ये दोष जीवन पर बडा दुष्प्रभाव डालते है। निर्दोष सुखचित रेखाएं सशक्त जीवन-प्रवाह का परिचय देती है। ये जीवन की सूक्ष्मतर मन: स्थितियों को इंगति करती है। हथेली के अग्रभाग में उंगलियों के नीचे बने विभिन्न ग्रहों के पर्वत मस्तिष्क के गुणों का विवेचन करते है। मस्तिष्क के गुण-दोषों के अनुसार हथेली की रेखाओं में बदलाव आता है। वस्तुत: ग्रहों के इन पर्वतों से मानसिक प्रवृत्तियों का पता चलता है, जबकि रेखाएं पूरे जीवन की व्याख्या करती है।

संसार में किसी भी व्यक्ति की हथेली से समानता नहीं पाई जाती। सत्य तो यह है कि हथेली ईश्वर की अप्रतिम कारीगरी का एक विशिष्ठ नमूना है। यदि सूक्ष्मता से देखे तो मानव हथेली में कुछ स्थानों पर (जैसा कि चित्र में दिखाया गया है) छोटी-छोटी मांसल गद्दियां-सी उभरी प्रतीत होती है। सामुद्रिक शास्त्र में इन गद्दियों को “पर्वत” की संज्ञा दी गई है। इन पर्वतों की उपस्थिति की कल्पना आकाशीय ग्रहों के आधार पर की गई है। खलोग विज्ञान के अनुसार आकाश में सात प्रमुख ग्रह है- सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरू (बृहस्पति), शुक्र और शनि पौराणिक मान्यता के अनुसार दो अदृश्य ग्रहों – राहु और केतु की भी परिकल्पना की गई है।

इधर नवीनतम अनुसांधानों से तीन अन्य ग्रह प्रकाश में आए है – हर्षल, नेपच्यून और प्लूटो। किन्तु जहां तक व्यावहारिकता, यथार्थ, अनुभूति और स्पष्टता की बात है; हथेली में सात ग्रहों के पर्वत ही दृष्टिगोचर होते है। इन पर्वतों का अस्तिžव मानव जीवन के लिए बहुत ही प्रभावकारी और महत्वपूर्ण होता है। विभिन्न रेखाओं की उत्पति और विकास में पर्वतों की मुख्य भूमिका होती है। प्रत्येक पर्वत संबंधित ग्रह के गुण-प्रभाव समाहित किए रहता है। हथेली पर पर्वत की उपस्थिति उस ग्रह के किस अनुपात में रखती है, यह पर्वत के विकास, उसकी अवस्थिति, ऊंचाई, आकार और आभार पर निर्भर होता है।

हथेली में ऊंचे उठे हुए, मांसल स्वस्थ और लालिमायुक्त पर्वत विकासित कहलाता है। अविकासित पर्वत प्राय: दिखाई नहीं देते। जो पर्वत पूर्णत: विकसित नहीं होते, उन्हें सामान्य पर्वत माना जाता है। इस्त सामुद्रिक शास्त्र के आधार पर प्रचलित ग्रहों से संबंधित पर्वतों का विवरण निम्नलिखित है – सूर्य पर्वत – विद्या, राज्य मानसिक उन्नति, प्रसिद्धि, सम्मान, यश तथा विविध कला-कौशल के अध्ययन में विशेष सहायक होता है।

चंद्र पर्वत – इस के द्वारा मानव की कल्पना-शक्ति, विशालता, सह्रदयता, मानसिक उत्थान तथा समुद्र-पारीय यात्राओं का अध्ययन किया जाता है। मंगल पर्वत – मंगल पर्वत को युद्ध, साहस, शक्ति परिश्रम तथा पुरूषोचित गुण आदि का बोध कराने वाला माना गया है। बुध पर्वत – बुध पर्वत वैज्ञानिक उन्नति, व्यापार और गणित संबंधी कार्य में अत्यधिक सहायक होता है। गुरू पर्वत – सौम्य ग्रह गुरू का पर्वत राज्यसेवा तथा इच्छाओं के प्रदर्शन आदि से संबंधित होता है।
हथेली का शुक्र पर्वत है शान-शौकत, कलाप्रेम का सूचक—–

शुक्र पर्वत : सुंदरता, प्रेम, शान-शौकत, कलाप्रेम तथा ऎश्वर्य-भोग आदि से संबंधित है।
शनि पर्वत : मननशीलता, चिंतन, एकांत-प्रेम, रोग, मशीनरी तथा व्यापार आदि से संबंधित है। वर्तमान में भारतीय और पाश्चात्य मान्यताओं के आधार पर अन्य ग्रहों के पर्वतों का वर्णन निम्नलिखित है- राहु पर्वत – राहु पर्वत आकस्मिक धन प्राçप्त, लॉटरी, हार्ट अटैक या अचानक घटित होने वाली घटनाओं का परिचायक है।
केतु पर्वत : यह धन, भौतिक उन्नति एवं बैक-बैलेंस आदि का सूचक है।
हर्षल पर्वत : इसका संबंध शारीरिक एवं मानसिक क्षमता से होता है। नेपच्यून पर्वत : विद्वता, व्यक्तित्व, प्रभाव तथा पुरूषार्थ का पता नेपच्यून पवत के माध्यम से चलता है। प्लूटो पर्वत : प्लूटो पर्वत द्वारा मानसिक चिंता तथा आध्यात्मिक उन्नति का ज्ञान होता है। विशेष : हर्षल, नेपच्यून और प्लूटो नवज्ञात ग्रह है। प्राचीन ग्रंथों में इनका कोई उल्लेख नहीं है।
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जिसके हाथों में हो त्रिभूज उसकी तो ऐश है—
बहुत लोगों की इच्छा होती है कि उनका जीवन बहुत ऐश्वर्यशाली हो और उन्हें सभी भौतिक सुख-सुविधाएं प्राप्त हो। बहुत पैसा हो और समाज में मान-सम्मान हो। ऐसी मनोकामनाएं तो काफी लोगों की होती हैं लेकिन यह जीवन सभी को प्राप्त नहीं होता। कुछ लोगों के हाथों में कुछ विशेष चिन्ह होते हैं वे जरूर ऐश्वर्यशाली जीवन व्यतीत करते हैं। हस्तरेखा ज्योतिष में कई ऐसे चिन्ह बताए गए हैं जो व्यक्ति को मालामाल बनाते हैं और सभी सुख-सुविधाएं प्राप्त कराते हैं।
हस्तरेखा ज्योतिष में जितना महत्व रेखाओं तथा पर्वतों का है। उतना ही महत्व हाथों में बनने वाले छोटे-छोटे चिन्हों का भी है। इन चिन्हों मे से ही एक चिन्ह त्रिभुज का है। जानिए इस चिन्ह के होने का हमारे भाग्य पर क्या प्रभाव पड़ता है?
– त्रिभुज हाथ में सपष्ट रेखाओं से मिलकर बना हो तो वह शुभ व फलदायी कहा जाता है।
-हथेली में जितना बड़ा त्रिभुज होगा उतना ही लाभदायक होगा।
-बड़ा त्रिभुज व्यक्ति के विशाल हृदय का परिचायक है।
-यदि व्यक्ति के हाथ में एक बड़े त्रिभुज में छोटा त्रिभुज बनता है तो व्यक्ति को निश्चय ही जीवन मे उच्च पद प्राप्त होता है।
-हथेली के मध्य बड़ा त्रिभुज हो तो वह व्यक्ति समाज में खुद अपनी पहचान बनाता है। ऐसा व्यक्ति ईश्वर पर विश्वास रखने वाला व उन्नतशील होता है।
– यदि त्रिभुज असपष्ट हो तो ऐसा व्यक्ति संर्कीण मनोवृति वाला होता है।
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प्यार और हस्तरेखा—–
अधिकतर लोगों के मुँह से यह सुनने में आता है कि हमारे तो गुण मिल गए थे परन्तु हमारे (पति-पत्नि) विचार नहीं मिल रहे हैं या हम लोगों ने एक-दूसरे को देखकर समझ-बूझकर शादी की थी। परन्तु बाद में दोनों में झगड़े बहुत होने लगे हैं। आप हस्तरेखा के द्वारा होने वाले धोखे, मंगेतर के बारे में या प्रेमी-प्रेमिका के बारे में जान सकते हैं।

किसी भी स्त्री या पुरूष के प्रेम के बारे में पता लगाने के लिए उस जातक के मुख्य रूप से शुक्र पर्वत, हृदय रेखा को विशेष रूप से देखा जाता है। इन्हें देखकर किसी भी व्यक्ति या स्त्री का चरित्र या स्वभाव जाना जा सकता है।

शुक्र क्षेत्र की स्थिति अँगूठे के निचले भाग में होती है। जिन व्यक्तियों के हाथ में शुक्र पर्वत अधिक उठा हुआ होता है। उन व्यक्तियों का स्वभाव विपरीत सेक्स के प्रति तीव्र आकर्षण रखने वाला तथा वासनात्मक प्रेम की ओर झुकाव वाला होता है। यदि किसी स्त्री या पुरूष के हाथ में पहला पोरू बहुत छोटा हो और मस्तिष्क रेखा न हो तो वह जातक बहुत वासनात्मक होता है। वह विपरीत सेक्स के देखते ही अपने मन पर काबू नहीं रख पाता है।

अच्छे शुक्र क्षेत्र वाले व्यक्ति के अँगूठे का पहला पोरू बलिष्ठ हो और मस्तक रेखा लम्बी हो तो ऐसा व्यक्ति संयमी होता है। यदि किसी स्त्री के हाथ में शुक्र का क्षेत्र अधिक उन्नत हो तथा मस्तक रेखा कमजोर और छोटी हो तथा अँगूठे का पहला पर्व छोटा, पतला और कमजोर हो, हृदय रेखा पर द्वीप के चिह्न हों तथा सूर्य और बृहस्पति का क्षेत्र दबा हुआ हो तो वह शीघ्र ही व्याकियारीणी हो जाती है।

यदि किसी पुरूष के दाएँ हाथ में हृदय रेखा गुरू पर्वत तक सीधी जा रही है तथा शुक्र पर्वत अच्छा उठा हुआ है तो वह पुरूष अच्छा व उदार प्रेमी साबित होता है। परन्तु यदि यही दशा स्त्री के हाथ में होती है तथा उसकी तर्जनी अँगुली अनामिका से बड़ी होती है तो वह प्रेम के मामले में वफादार नहीं होती है। यदि हथेली में विवाह रेखा एवं कनिष्ठा अँगुली के मध्य में दो-तीन स्पष्ट रेखाएँ हो तो उस स्त्री या पुरूष के उतने ही प्रेम सम्बन्ध होते हैं।

यदि किसी पुरूष की केवल एक ही रेखा हो और वह स्पष्ट तथा अन्त तक गहरी हो तो ऐसा जातक एक पत्निव्रता होता है और वह अपनी पत्नी से अत्यधिक प्रेम भी करता है। जैसा कि बताया गया है कि विवाह रेखा अपने उद्गम स्थान पर गहरी तथा चौड़ी हो, परन्तु आगे चलकर पतली हो गई हो तो यह समझना चाहिए कि जातक या जातिका प्रारम्भ में अपनी पत्नि या पति से अधिक प्रेम करती है, परन्तु बाद में चलकर उस प्रेम में कमी आ गई है।
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हस्तरेखा और वैवाहिक जीवन—

हमारे हाथों की अलग- अलग रेखाएं जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं के बारे में बताती हैं। ऐसी ही एक रेखा है विवाह रेखा। आइए देखते हैं कि यह रेखा हमारे वैवाहिक जीवन के भविष्य के बारे में क्या बताती है-

1. यदि बुध क्षेत्र के आसपास विवाह रेखा के साथ-साथ दो-तीन रेखाएं चल रही हों तो व्यक्ति अपने जीवन में पत्नी के अलावा और भी स्त्रियों से रिलेशनशिप में रहता है।

2. शुक्र पर्वत पर टेढ़ी रेखाओं की संख्या यदि ज्यादा हैं तो ऐसे व्यक्ति के जीवन में किसी एक स्त्री या पुरुष का विशेष प्रभाव रहता है।

3. यदि प्रारम्भ में विवाह रेखा एक, किन्तु बाद में दो से अधिक रेखाओं में विभक्त हो जाए तो ऐसी स्थिति में व्यक्ति एक साथ कई रिलेशनशिप में रहता है।

4. किसी व्यक्ति के विवाह रेखा में आकर या विवाह रेखा स्थल पर आकर कोई अन्य रेखा मिल रही हो तो प्रेमिका के कारण उसका गृहस्थ जीवन नष्ट होने की संभावना रहती है।

5. यदि प्रणय रेखा आरम्भ में पतली और बाद में गहरी होने का मतलब है कि किसी स्त्री अथवा पुरुष के प्रति आकर्षण एवं लगाव आरम्भ में कम था, किन्तु बाद में धीरे-धीरे प्रगाढ़ होता गया है।

6. किसी की हथेली में विवाह रेखा एवं कनिष्ठका अंगुली के मध्य से जितनी छोटी एवं स्पष्ट रेखाएं होंगी, उस स्त्री या पुरुष के विवाहोपरान्त अथवा पहले उतने ही प्रेम सम्बन्ध होते हैं।

7. विवाह रेखा आपके सुखी वैवाहिक जीवन के बारे में भी बताती है। यदी आपकी विवाह रेखा स्पष्ट तथा ललिमा लिए हुए है तो आपका वैवाहिक जीवन बहुत ही सुखमय होगा।

8. गुरू पर्वत पर यदि क्रॉस का निशान लगा हो तो यह शुभ विवाह का संकेत होता है। यदि यह क्रॉस का निशान जीवन रेखा के नज़दीक हो तो विवाह शीघ्र ही होता है।
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हथेली पर ग्रहों का स्थान एक अध्ययन——
स्वभाव और भाग्य की दृष्टि से हाथों को छः सात भागों में बांटा गया। प्रत्येक वर्ग या विभाजन का अलग संकाय रखा गया। इस प्रकार हाथ की बनावट को देख लेने भर से ही जातक के स्वभाव का कच्चा चिट्ठा सामने आ जाता है। इसके साथ-साथ अंगुलियां, कर पृष्ठ (हथेली के पीछे का भाग), हाथों के रोएं या बाल, नाखून व अंगुलियों, अंगूठों के जोड़ आदि के संबंध में एक पूरा शास्त्र गढ़ दिया गया है।

हथेली पर ग्रहों की अवधारणा हथेली में क्योंकि ग्रह अपने स्थान से उठ जाते हैं या खिसक जाते हैं अतः इनको एक नाम पर्वत भी दिया गया है। हथेली को छोटे-छोटे नौ हिस्सों (पर्वत या क्षेत्र) में विभाजित कर प्रत्येक हिस्से को एक पृथक व स्वतंत्र नाम दिया गया है व आसानी के लिए इनको सौर मंडल के ग्रहों के नाम पर इनका नामकरण कर दिया गया है। आयरलैंड के विश्व प्रसिद्ध हस्तरेखा शास्त्री श्री काऊंट लूइस हेमन (कीरो) भी यह मानते हैं कि इन नामों की स्थापना अटकल या कल्पना पर आधारित है।

कीरो ने स्वयं इन ग्रहों को ज्यादा महत्व नहीं दिया था। परंतु यह निश्चित है कि ग्रहों के हथेली पर उन्नत होने पर जीवन में भौतिक सुख की प्राप्ति होती है। यह एक संपूर्ण सत्य है। अगर ग्रह क्षेत्र उन्नत नहीं है तो जीवन में सफलता विशेष रूप से भौतिक सफलता कम ही मिलती है। धन की हमेशा परेशानी बनी रहती है। हथेली पर जिन नौ ग्रहों की स्थापना की गई है वे हैं- सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु। इन सभी को अपना एक पृथक स्थान आवंटित है जैसा कि इस चित्र में दिखाया गया है। सबसे विशाल स्थान शुक्र और चंद्रमा को आमने-सामने दिया गया है। मंगल को दो क्षेत्रों का स्वामी बनाया गया है। अंगूठे के पास का मंगल स्थान नकारात्मक कहलाता है और चंद्रमा के ऊपर का मंगल सकारात्मक कहा गया है। हथेली के मध्य भाग को राहु का क्षेत्र कहा जाता है।

जन्मकालीन ग्रहों का प्रभाव हथेली के पर्वतों पर भी होता है। यदि जन्मकुंडली भाग्यशाली ग्रहों को दर्शाती है तो सभी ग्रह हथेली में अपने स्थानों पर उभर आते हैं। अक्सर यह भी देखने में आता है कि जन्म कुंडली में जो ग्रह अकारक हो वह भी हथेली में उन्नत ही दिखाई देता है। इस प्रकार वह अपने प्रभाव की बजाए अपने स्वभाव को दर्शाता है। हथेली में बृहस्पति का सीधा संबंध बुद्धि से है। जन्मकुंडली में वह चाहे किसी भी भावों का स्वामी क्यों न हो हथेली में जिन लोगों के गुरु क्षेत्र का अभाव है अर्थात बृहस्पति दबा हुआ है, ऐसे जातक अत्यंत सामान्य बुद्धि के होते हैं। और मात्र भोगी बन कर जीवन को नष्ट कर देते हैं। ये लोग श्रमशील जीवन बिताते हैं और बुद्धि को कम-से-कम उपयोग में लेते हैं।

अक्सर अविकसित बृहस्पति के जातक कुएं के मेंढ़क पाये जाते हैं। शोध के दौरान यह भी सामने आया कि अविकसित या अर्धविकसित गुरु के क्षेत्र के स्वामी धार्मिक प्रवृत्ति के पाये गए। दूसरी तरफ गुरु प्रधान या उन्नत और विकसित गुरु के स्वामी प्रखर बुद्धि वाले होते हैं। जीवन में मिली उपलब्धियों से संतुष्ट न होने वाले ये जातक इधर-उधर हाथ पांव मारते रहते हैं और 40 वर्ष की आयु के आते-आते समाज में एक निश्चित और प्रतिष्ठित स्थान बना लेते हैं। यदि बृहस्पति का पर्वत अन्य पर्वतों की तुलना में बहुत ज्यादा उभार लिए हो तो ऐसा जातक अभिमानी होता है। बृहस्पति ग्रह के पास व मध्यमा अंगुली के ठीक नीचे जो स्थान शनि अधिकृत है वह गुफा की तरह गंभीर प्रवृत्ति को व्यक्त करता है। बहुत अधिक हाथों में इसे अविकसित पाया गया। कुछ मामलों में यह बृहस्पति पर्वत से भी जा मिलता है।

जिन लोगों की हथेलियों में एक मात्र शनि ही विकसित हो वे आवश्यकता से ज्यादा गंभीर होते हैं। ये लोग एकांतवास पसंद करते हैं और कम से कम लोगों से मेल रखते हैं। प्रायः ये लोग निगूढ़ विद्याओं में कुछ असर रखते हैं। अनामिका के नीचे का क्षेत्र जिसको सूर्य का क्षेत्र कहते हैं, स्वतंत्र रूप से उठा हुआ नहीं देखा गया। जिन लोगों के हाथ में यह क्षेत्र गढे्दार है वे अपनी शिक्षा पूर्ण नहीं कर पाते। अच्छे और पूर्ण विकसित सूर्य क्षेत्र के स्वामी समाज में प्रतिष्ठित और धनिक होते हैं। ऊपर के चारों ग्रहों के समान ही सूर्य की भी स्थिति रहती है। यदि तीन अन्य ग्रह अविकसित हैं तो सूर्य भी प्रायः अविकसित ही होगा। अकेला गुरु प्रधान जातक मिल सकता है तथापि अकेला सूर्य प्रधान जातक बहुत कम देखने में आता है।

सूर्य प्रधान लोग समाज को नेतृत्व प्रदान करते हैं। यदि सूर्य रेखा भी बलवान हो तो जातक को राजनीति में सफलता प्राप्त होती है। कनिष्ठिका अंगुली के ठीक नीचे का स्थान जिन लोगों के उठावदार हों वे अधिकारी वर्ग के जातक होते हैं। यदि इस पर्वत पर दो चार खड़ी रेखाएं हो तो जातक जीवन में सफल रहता है। अच्छे बुध प्रधान जातक अपने आस-पास एक प्रतिष्ठा का घेरा बना कर रखते हैं। ये बहुत वाकपटु और चालाक होते हैं। उच्च पदस्थ अधिकारियों के हाथों में बुध की प्रधानता देखी गई है। वाणी पर इनका विशेष अधिकार होता है। जिस जातक का मंगल विकसित होता है वे परिवर्तनशील जीवन बिताते हैं। उनमें तुरंत शांत हो जाने वाले क्रोध की मात्रा अधिक होती है। ये लोग रोगों का शीघ्रता से शिकार बनते हैं। यह ग्रह स्थान अधिक आड़ी तिरछी रेखाओं के जाल से युक्त हो तो जातक का जीवन बहुत उतार-चढ़ाव पूर्ण रहेगा। प्रायः जीवन में संघर्ष रहेगा और लड़ाई झगड़े होते रहेंगे। बहुत सी बाधाएं आ कर जीवन में समस्याएं पैदा करती हैं।

दुःसाहसी लोगों के हाथों में मंगल को पूर्ण विकसित पाया गया है। मंगल आत्मविश्वास देता है परंतु व्यक्ति को जल्दबाज भी बनाता है। चंद्रमा का क्षेत्र कल्पनाशक्ति और बुद्धि का कारक है। कल्पनाशील व्यक्तियों के हाथों में इसे विकसित पाया गया है। जिन जातकों के हाथों में चंद्रमा का पर्वत अविकसित हो या इस पर आड़ी तिरछी रेखाओं का जाल हो तो ऐसा जातक पेट संबंधी रोगों से ग्रस्त रहता है। जीवन के आरम्भिक काल में इनको दुर्भाग्य का भी सामना करना पड़ सकता है। चंद्रमा के स्थान पर गहरा गड्ढा हो तो जातक मानसिक रूप से परेशान रह सकता है। ऐसे लोगों के पारिवारिक संबंधों में वैमनस्य और परस्पर सामंजस्य का अभाव होता है। राहु और केतु को हथेली में सर्वमान्य स्थान नहीं प्राप्त है। तथापि जैसा कि चित्र में दर्शाया है वे स्थान राहु और केतु के लिए वर्तमान में निर्धारित किये गये हैं।

यदि भाग्य रेखा राहु क्षेत्र से आरंभ हो तो वह अपने सही समय की बजाए देरी से फलित करती है। राहु के क्षेत्र अर्थात हथेली के मध्य में गहरापन हो तो भी जातक जीवन भर अभावग्रस्त ही रहता है। केतु के स्थान से जातक को अचानक मिलने वाली संपत्ति के बारे में पता लगाया जाता है। केतु का स्थान विकसित हो या इस स्थान पर कोई शुभ चिह्न हो तो जातक को धन का अभाव नहीं होता। शुक्र के क्षेत्र के संबंध में एक स्थूल तथ्य तो यह उभर कर सामने आया है कि जिन जातकों के हाथों में एक मात्र शुक्र का क्षेत्र ही विकसित हो और शेष ग्रह विकसित नहीं हो या अर्धविकसित हों तो ऐसा जातक बुद्धिहीन और स्थूल विचारों का होता है। इस श्रेणी के कुछ जातकों का दांपत्य जीवन भी उलझा हुआ मिला।

शुक्र से संबंधित जो तथ्य अब तक प्रचारित हैं वे सब शोध के निष्कर्ष में खरे नहीं उतरे। अधिकतर तथ्य तो विपरीत ही प्राप्त हुए हैं। जैसे शुक्र से संबंधित यह एक सर्वमान्य तथ्य है कि जिन जातकों के शुक्र का क्षेत्र पूर्ण विकसत हो वे लोग सौंदर्यप्रिय, जीवन शक्ति से ओत-प्रोत, कला पारखी और संगीत के शौकीन होते हैं। परंतु उपरोक्त उन्नत शुक्र का फलित सर्वदा विपरीत ही दिखाई देता है। बड़े-बड़े शुक्र के स्वामियों को सीधा-साधा जीवन जीते देखा गया है। वे कला, साहित्य व संगीत से परिचित ही नहीं न उनकी इनमें रूचि ही मिली। अच्छे शुक्र प्रधान व्यक्ति कला या सौंदर्य के क्षेत्र में भी काम करते नहीं पाये गये। वे सभी कठिन कार्य में रत मिले। अनुभव के आधार पर अकेला शुक्र यदि विकसित हो तो व्यक्ति मात्र भोगी ही होता है। लेकिन शुक्र के साथ यदि बृहस्पति, सूर्य और बुध भी पूर्ण विकसित हों तो ही व्यक्ति सफल जीवन जी सकता है। यह तथ्य तो अनुभव में अवश्य आता है कि यदि जन्मकुंडली में शुक्र अस्त हो तो उसका सीधा असर हथेली के शुक्र पर होता है। ऐसी अवस्था में शुक्र भली प्रकार से विकसित या कांतिपूर्ण नहीं रहता है। शुक्र क्षेत्र पर बनने वाला काला धब्बा या बड़ा तिल जातक की काम शक्ति को कम करता है।
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राज जो आपकी छोटी अंगुली में है——

हाथ की छोटी अंगुली को देखकर आपके सामने पैसों से जूड़ा हर राज खुल जाता है लेकिन और भी खास बात हैं आपकी इस छोटी अंगुली में जो आपको दुसरे राज भी खोल देती है।
हाथ में अंगुलियों के नीचे के भाग को हस्तज्योतिष के अनुसार पर्वत या मांउट कहा जाता है। इन पर्वतों का दबे या उठे होने का अपना प्रभाव होता है। हाथ में लिटिल फिंगर के नीचे के भाग को बुध क्षेत्र कहा जाता है। जिन लोगों के हाथ में लिटिल फिंगर के नीचे का भाग उभरा हुआ स्पष्ट और लालिमा लिया हुआ अन्य पर्वतो से अधिक उभरा हुआ दिखाई देता है, तो ऐसे व्यक्तियों को बुध प्रधान माना जाता है

ऐसे लोगों में गजब की बुद्धि और चातुर्य होता है। ये लोग बहुत अच्छे अभिनेता होते हैं। ये अपने बच्चों और परिवार के प्रति समर्पित होते हैं। इनमें दूसरे लोगों के मन में क्या चल रहा है ये लोग बड़ी आसानी से समझ लेते हैं। इसलिए बिजनेस में बहुत सफल होता है। ये अपने जीवनसाथी के रूप में उन्हे पसंद करते हैं जो साफ-सुथरे और सलीके से रहने वाले हो और ऐसे पति चाहते हैं कि उनकी पत्नी अच्छे ढंग के कपड़े पहने। इन व्यक्तियों मे उत्सुकता बहुत अधिक होती हैं। ऐसे लोग अपने जीवन में सफल वैज्ञानिक, व्यापारी होते हैं।ये जितने अच्छे नायक होते हैं, विषम परिस्थितियां आने पर उतने ही खतरनाक भी होते हैं।

अच्छे और बुरे दिन आने से पहले आपके हाथ का रंग बदलने लगता है।
अगर आपके हाथ रंग बदल रहा है तो इसे हल्के में न लें। ये कोई साधारण इशारा नहीं है। ये इशारा आपको बड़ी बीमारी से बचा सकता है क्योंकि अपना हाथ ध्यान से देखने में आपको ये पता चल जाएगा कि आपको कैसी बीमारी होने वाली है।
कैसे समझें हाथ का इशारा—-

अगर आपकी हथेली गुलाबी और चित्तीदार है तो हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार आपका स्वास्थ्य सामान्य है और आप आशावादी और खुशमिज़ाज व्यक्ति हैं।

अगर आपकी हथेली का रंग धीरे-धीरे हल्का लाल होता जा रहा है तो यह इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में आप ब्लडप्रैशर की समस्या से परेशान हो सकते हैं।

लाल रंग की हथेली आपके स्वभाव के बारें में भी बताती है कि आप अपने गुस्से पर नियंत्रण नहीं रख पाते हैं एवं छोटी छोटी बातों पर आवेश में आ जाते हैं।

अगर हथेली का रंग धीरे-धीरे पीला होता जा रहा है तो आपकी हथेली का रंग कहता है कि आप आपके शरीर में रक्त की कमी होने के रोग हो सकते हैं। संभव है कि आप एनिमिया के शिकार हो सकते हैं। हथेली का रंग पीला है तो यह संकेत है कि आप रोगग्रस्त हैं। आपके शरीर में पित्तदोष है। हाथ का रंग आपके स्वभाव के बारे में बताता है कि आप स्वार्थी हैं साथ ही आपका स्वभाव चिड़चिड़ा है।

हथेली का रंग नीला पडऩे लग गया है तो आप यह समझ सकते हैं कि आपके शरीर में रक्त संचार की गति धीमी है और हो सकता है कि आपके अंदर आलस्य की भावना हो।

हथेली का रंग गुलाबी है तो स्वास्थ एवं स्वभाव दोनों ही दृष्टि से आप बहुत अच्छे हैं। हथेली का ऐसा रंग अत्यंत उत्तम है।

हथेली अगर काफी लाल दिखाई देती है तो आपका स्वभाव बहुत ही उग्र हो सकता है आप क्रोध में सीमा से बाहर जा सकते हैं अर्थात मार पीट भी कर सकते हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से इस प्रकार की हथेली होने पर आप मिर्गि रोग से पीडि़त हो सकते हैं।
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उंगलियां देखकर चुनें जीवन संगिनी—–

अक्सर मर्द अपने लिए जीवनसाथी की तलाश करते वक्त रंग-रूप और हाइट में उलझकर रह जाते हैं। जीवनसाथी की तलाश कर रहे हैं, तो उनकी उंगलियों पर भी एक नज़र जरूर डाल लें। क्योंकि यही उंगलियां आपकी जीवन संगिनी के साथ आपके भविष्य के बारे में बताएंगी। आइए जानें, इन उंगलियों में कैसे छिपा है आपकी खुशहाली का राज-

—यदि महिलाओं की उंगलियां गोल और लंबी हों तो ऐसी महिलाएं अपने और अपने पति के लिए भी बेहद सौभाग्यशाली मानी जाती हैं।
—–चिकनी, सीधी और गांठ रहित उंगलियों का मतलब है कि ऐसी महिलाएं वैवाहिक जीवन के लिए अति उत्तम हैं।
——उंगली के आगे का हिस्सा पतला हो और सभी पोर एक समान हो तो इसे भी वैवाहिक सुख-शांति की नजर से बेहतर माना गया है।
—–जिन महिलाओं की उंगलियां छोटी होती हैं, वे जरूरत से ज्यादा खर्चीली होती हैं। दोनों हाथों की उंगलियों को जोड़ने पर
उनके बीच यदि खाली जगह दिख रहे हैं तो इसका मतलब भी उनका खर्चीला होना ही है। ऐसी महिलाओं का भविष्य काफी कठिनाइयों से भरा होता है।
——महिलाओं की उंगलियों में तीन पर्व का होना भाग्यशाली होता है। लेकिन इसकी जगह यदि किसी की उंगलियों में चार पर्व यानी पोर हों और उंगलियां छोटी-छोटी हों, जिसपर मांस न हो तो वे महिलाएं पति के लिए और खुद के लिए भी भाग्यशाली नहीं होतीं।
——-स्कंद पुराण में यह चर्चा की गई है कि यदि किसी महिला की हथेली के पीछे बाल हों तो संभल जाइए, क्योंकि ऐसी महिलाओं को अपने वैवाहिक जीवन में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ऐसी महिलाओं से शादी करने का मतलब है कि आप हमेशा तनावपूर्ण स्थिति के बीच रहेंगे।

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